नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रधान को इस्तीफा देना ही था। उन्होंने प्रधान को भ्रष्टाचार का प्रतीक बताते हुए कहा कि उन्होंने देश के शिक्षा तंत्र को कमजोर कर दिया है। राहुल ने छात्रों को समर्थन का आश्वासन देते हुए कहा कि वे छात्रों और उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
राहुल गांधी ने कहा, "हमारा शिक्षा तंत्र, जिसे कभी दुनिया भर में सराहा जाता था, अब हमलों का शिकार हो रहा है और इसका निजीकरण किया जा रहा है। इसमें प्रधानमंत्री मोदी और आरएसएस दोनों की बराबर जिम्मेदारी है।"
छात्रों पर हिंसा के लिए अमित शाह को ठहराया जिम्मेदार
राहुल गांधी ने छात्रों पर हुई हिंसा के लिए गृह मंत्री अमित शाह को सीधे जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि छात्रों पर पैलेट गन का इस्तेमाल अस्वीकार्य है और पुलिस की इस कार्रवाई को सहन नहीं किया जा सकता।
दिन के पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी राहुल गांधी ने पेपर लीक मुद्दे पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा था कि धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाना ही होगा। मंत्रालय बदलने का विचार भी अस्वीकार्य है। राहुल ने प्रधानमंत्री मोदी से युवाओं से माफी मांगने की मांग की, कहते हुए कि मोदी भारत के अतीत हैं और अतीत भविष्य से लड़ नहीं सकता।
तीन प्रमुख मांगें
राहुल गांधी ने छात्रों की तीन प्रमुख मांगों को दोहराया और कहा कि इनसे कोई समझौता नहीं होगा:
- धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाया जाए।
- छात्रों पर कार्रवाई करने वाले दिल्ली पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को छात्रों पर हुए हमले के लिए माफी मांगनी चाहिए।
राहुल गांधी ने छात्रों की हिम्मत की सराहना की और कहा कि ये छात्र डरने वाले नहीं हैं और देश के भविष्य का प्रतिनिधित्व करते हैं।
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