ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत पहुंचे। दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका स्वागत किया। इस मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन को तमिल संत और कवि तिरुवल्लुवर की महान कृति ‘तिरुक्कुरल’ का रूसी भाषा में अनुवादित संस्करण भेंट किया। करीब 2000 साल पुरानी इस पुस्तक को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन को यह पुस्तक भेंट करते हुए भारत और रूस के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने का संदेश दिया। तिरुक्कुरल का रूसी अनुवाद इसी साल 2026 में किया गया है। इस पुस्तक के माध्यम से भारत की प्राचीन तमिल ज्ञान परंपरा को रूसी पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।

तमिल भाषा की महान शास्त्रीय कृति

तिरुक्कुरल को तमिल भाषा की महानतम शास्त्रीय कृतियों में गिना जाता है। इसके रचनाकार तमिल संत और कवि तिरुवल्लुवर हैं। इस कृति की रचना का सटीक काल निश्चित नहीं है, लेकिन इसे सामान्य तौर पर लगभग दो हजार साल पुरानी परंपरा से जोड़ा जाता है।

तिरुक्कुरल में व्यक्तिगत जीवन से लेकर समाज, शासन, नैतिकता, प्रेम और मानवीय व्यवहार तक से जुड़े विचार मिलते हैं। यही वजह है कि इसे महत्वपूर्ण नैतिक और दार्शनिक कृतियों में शामिल किया जाता है। यह पुस्तक केवल धार्मिक या साहित्यिक रचना नहीं है, बल्कि इसमें जीवन जीने, समाज चलाने और अच्छे नेतृत्व से जुड़े विचार भी प्रस्तुत किए गए हैं।

तीन बड़े हिस्सों में बांटी गई है कृति

तिरुक्कुरल की पूरी रचना को तीन बड़े हिस्सों में विभाजित किया गया है। इनमें जीवन के अलग-अलग पहलुओं को समझाने का प्रयास किया गया है।

1. अरम:
इस हिस्से में नैतिकता, सदाचार और सही आचरण से जुड़े विचार हैं। इसमें सत्य, दया, आत्मसंयम, अच्छे व्यवहार और दूसरों के प्रति जिम्मेदारी जैसे विषयों पर जोर दिया गया है। यह हिस्सा व्यक्ति को बेहतर जीवन जीने और अच्छा इंसान बनने की प्रेरणा देता है।

2. पोरुल:
इस भाग में राज्य, शासन, राजनीति, अर्थव्यवस्था और सामाजिक जीवन से जुड़े विषयों पर विचार दिए गए हैं। इसमें राजा, प्रशासन, न्याय, मंत्री, सेना, कूटनीति, मित्र और दुश्मन जैसे विषय शामिल हैं। तिरुवल्लुवर ने जिम्मेदार नेतृत्व और अच्छे शासन की कसौटियों पर भी चर्चा की है।

3. इनबम:
तिरुक्कुरल के तीसरे हिस्से में प्रेम और मानवीय भावनाओं को स्थान दिया गया है। इसमें इंसानी रिश्तों और भावनात्मक अनुभवों से जुड़े विचार मिलते हैं। इस तरह एक ही कृति में व्यक्ति का चरित्र, समाज की व्यवस्था, शासन की नीति और प्रेम जैसी भावनाओं को समेटा गया है।

1330 दोहों में समाए बड़े विचार

तिरुक्कुरल की संरचना भी बेहद अनोखी है। पूरी कृति में 1330 दोहे हैं, जिन्हें 133 अध्यायों में बांटा गया है। प्रत्येक अध्याय में 10 दोहे हैं। हर दोहा केवल दो पंक्तियों का होता है, लेकिन उनमें जीवन और समाज से जुड़े गहरे विचार समाहित हैं।

तिरुक्कुरल का प्रभाव केवल भारत तक सीमित नहीं है। इसका कई भाषाओं में अनुवाद किया जा चुका है। केंद्रीय शास्त्रीय तमिल संस्थान के मुताबिक, तिरुक्कुरल का 65 भाषाओं में अनुवाद हो चुका है और यह छह महाद्वीपों तक पहुंच चुका है। रूसी भाषा में इसका अनुवाद भी इसी सांस्कृतिक प्रसार की कड़ी है।

भारत-रूस के सांस्कृतिक संबंधों का संदेश

राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तिरुक्कुरल का रूसी संस्करण भेंट करना कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह पुस्तक भारत की विविधता और प्राचीन ज्ञान परंपरा को सामने रखती है। खास बात यह है कि पीएम मोदी ने उत्तर भारत से जुड़ी किसी कृति के बजाय दक्षिण भारत की तमिल भाषा की प्राचीन रचना को उपहार के रूप में चुना।

इससे यह संदेश भी सामने आता है कि भारत की संस्कृति केवल एक क्षेत्र या भाषा तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की अलग-अलग भाषाओं और परंपराओं में उसका व्यापक स्वरूप दिखाई देता है। तिरुक्कुरल के जरिए भारत और रूस के बीच संबंधों को रणनीतिक सहयोग के साथ-साथ सांस्कृतिक जुड़ाव से भी जोड़ने का प्रयास किया गया है।

प्रधानमंत्री मोदी का यह उपहार भारत की प्राचीन साहित्यिक विरासत, तमिल ज्ञान परंपरा और दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित करता है।