मध्यप्रदेश सरकार ने शहरीकरण और औद्योगिक विस्तार के बढ़ते दबाव के बीच जल संसाधनों के सतत् प्रबंधन के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित 'अर्बन ग्रोथ कॉनक्लेव 2.0' में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने "मध्यप्रदेश उपचारित अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण एवं पुनः उपयोग नीति-2026" का प्रारूप सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया। इस नीति का उद्देश्य उपचारित अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग को बढ़ावा देना और प्रदेश को जल-सुरक्षित बनाना है।

  • नीति का लक्ष्य 2027 तक 20%, 2030 तक 30% और 2037 तक 50% उपचारित जल के पुनः उपयोग का है।
  • उद्योगों, निर्माण कार्यों, उद्यानों, सड़क सफाई, और सिंचाई जैसे गैर-पेयजल उपयोगों में उपचारित जल को प्राथमिकता मिलेगी।
  • जनस्वास्थ्य और पर्यावरण सुरक्षा के लिए जल गुणवत्ता की निगरानी और दोहरी पाइप लाइन प्रणाली लागू की जाएगी।
  • उपचारित जल के भंडारण व वितरण के लिए नई अवसंरचना का विकास कर निवेश और रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
  • पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के जरिए परियोजनाओं की वित्तीय स्थिरता को प्रोत्साहित किया जाएगा।
  • राज्य स्तरीय उच्चाधिकार प्राप्त संचालन समिति के माध्यम से नियमित निगरानी और जल मांग का आकलन किया जाएगा।

 मुख्यमंत्री डॉ. यादव की "सबका साथ, सबका विकास" की नीति के तहत सभी नागरिकों से आग्रह है कि वे इस ड्रॉफ्ट पर अपने सुझाव और विचार साझा करें ताकि इसे और भी प्रभावी बनाया जा सके।

इस नीति के माध्यम से मध्यप्रदेश सरकार जल संरक्षण की दिशा में एक नई मिसाल पेश करने जा रही है। यह पहल न केवल जल संसाधनों पर दबाव कम करेगी, बल्कि प्रदेश को "विकसित मध्यप्रदेश@2047" के लक्ष्य की ओर अग्रसर करेगी। 'अर्बन ग्रोथ कॉनक्लेव 2.0' के माध्यम से सरकार, उद्योग और निजी निवेशकों के बीच सहयोग को बढ़ावा मिलेगा, जिससे प्रदेश जल सुरक्षा और समृद्धि की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा।